माहौल आज-कल!
At your service majesty जंगलों में जिनके आज-अभी अवशेष रहते हैं| हक़ीक़त है इतने ही हौसले आखिर में शेष रहते हैं|| अख़बार या दीवार को जो ख़ास हैं कहते| अंदर भी उन्हींके कई-कई भेस रहते हैं|| जो हाथ-पैरों को आवाज़ से महफ़ूज़ रख लेते| झोली में उन्हीं की मुकम्मल लोग रहते हैं|| चलन है मीडिया कुछ भी फैला दो दार हो चाहे| आस्तीनों में उन्हीं की कहीं पर सांप रहते हैं || सनातनी की तनातनी या आर्यसमाज का खाना | गुज़रना मत कभी यहाँ पर नीच रहते हैं || माहौल नफ़रत का तुम भी सहयोग दो थोड़ा| लोगों का काम है लड़ना लो हम हाथ देते हैं || भेस = Compositions/Faces. महफ़ूज़ = Preserved. मुकम्मल = ...