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Showing posts from December 30, 2018

शुक्रगुज़ार

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तुम्हें वक्त का ठहराव भी ठीक लगे और हो पसंद उसमें तुम्हें बदलाव, पर जो हो पसंदीदा उसमें सुलझा सा दांव । क्योंकि इतना शुक्रिया होना अभी है कम। तुम्हें स्वर्गीय सुख भी पसंद हो और नरक की भीड़ भी ठीक ठाक लगे, पर हो पसंदीदा उनमें कुदरत सा फैलाव । क्योंकि... तुम्हें इस्लामी अर्ज़ भी पसंद हो और हो पसंद सनातनी नमस्कार , पर जो हो पसंदीदा हो वो हिंदुस्तानी बर्ताव । क्योंकि... तुम्हें नगर की धूल भी ठीक लगे और पसंद आए नन्हें-नन्हें गांव भी, पर पसंदीदा हो उनमें इंसानी बदलाव । क्योंकि... तुम्हें राजनैतिक त्यौरियां भी पसंद हो और ठीक लगे फिल्मी टकराव , पर जो हो पसंदीदा हो वो नागरिकता का भाव । क्योंकि... तुम्हें बिसरे की याद भी सताए और भविष्य की उम्मीद भी पसंद हो, पर जो हो पसंदीदा हो नया सालाना ताव । क्योंकि इतना शुक्रिया होना अभी कम है। नववर्ष की शुभकामनाओं सहित। -©अंकुश कुमार