इल्ज़ाम किसको?


गरीब नशे में है तो क्या हुआ, तुम भी तो कहकशे में हो|
दुनिया दरबदर हो तो क्या ग़म, फख्र में हो लहज़े में हो||


तहज़ीबों से पर्दा उठाना जायज़ समझो गर|
आबाद रखो खुदको, क्यूंकि फ़कत तकलीफ़ में हो||


हाथों से नहीं तो आंखों से थाम लेना खुदको|
क्यूंकि जम्हूरियत का कहा ग़लत ना होगा, फ़कीरी में हो||


ग़मों की नुमाइश अब्र से कभी ना करना|
लगेगा ऐसा ज़रूरत नहीं पर हक़ीक़त में हो||


ज़माना भूले बिसरे, तुम पर ज़रूर याद रखना|
समझते देर नहीं लगती नज़ीर कि तुम नशे में हो||








1. कहकशा        =                   The road to the stars.
2. जम्हूरियत    =                   Democracy.
3. अब्र               =                   Cloud.

:© "Ankush Arya", 2017

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