अजगर बैठे हैं!

Name shouldn't be enough.

यहाँ बस खामखां बुतों से लिपटे हैं लोग|
बाकी दुनिया में  कोई धंधा परेशानी नहीं है|| 

कभी इंशाअल्लाह तो कभी भगवान भला करेगा|
तमाशा है क्या बेटा! ज़िन्दगी है कोई नादानी नहीं है||

बयार पे लिपटी जमात खड़खड़ाते पत्तों सी हो गई|
बुढ़ापा है! बचपना है! यहाँ बस जवानी नहीं है||

होठों और मुँह पे चिपके हैं थप्पड़ और गालियां|
समाज में आदत है! फ़ख्र है! ये कोई बीमारी नहीं है||

तारीफ़ों के हैं झूठे फ़ूल और बहती हैं मतलब की नदियाँ|
बाकी मेहनत की कोई यहाँ बागबानी नहीं है||

कभी कहते हैं काट देंगे गला चीर देंगे सीना पी जाएंगे खून|
हाह! हँसी आती है, ये कोई गौमूत्र या जमजम का पानी नहीं है||

:© "Ankush Arya", 2017

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