काफ़िर के जज़्बात
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ऐसा भी कोई मसला नहीं था हुज़ूर|
इंज़ील जो हिचकियों में मसल डाला||
दोज़ख से भी ना घबराये जानिब कभी|
जो हुकुम ने दिया तरेर और डरा डाला||
क्या कज़ा क्या शिकन लाये माथे पर|
जो तारीफ़-ए-बयार की अदा ने फना डाला||
मुद्दतों के सपने और ज़िंदादिली ये ज़िंदा|
तिरि तहरीकों ने काफिर-ज़िंदा-बुत बना डाला||
कभी घुटनों पे टिके तो कहीं वुज़ू में हैं झुके|
साज़िश है! कहाँ नमाज़ी थे कहाँ काफ़िर बना डाला||
अब इन जुलूसों में कहाँ टिक पायेंगे बुतपरस्त|
'नज़ीर' इन नज़रों ने कभी बना डाला कभी मिटा डाला||
1. इंज़ील = Grim The Reaper
2. दोज़ख = The Netherworld
3. कज़ा = Death
4. फना = Annihilate
5. मुद्दत = A while
6. ज़िंदादिली = Cheeriness
7. तहरीक = Proposal
8. वुज़ू = Prayer
9. बुतपरस्त = Pagan
:© "Ankush Arya", 2017

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