कठघरा

मंदिर किन्हीं ख़ास अभिजात्य वर्ग के लिए तब भी ऐशगाह थे,
आज भी हैं और हमेशा रहेंगे और रहेंगे,
रहेंगे तब तलक!

जब तलक किसी किसी भी मूर्त्ति को वहाँ से जाता नहीं निकाला,
किया जाता कठघरे में खड़ा और जाता पूछा,
बताओ हर ऐश के हिस्से में तुम्हारा क्या किस्सा है,
और इस किस्से के कितने हिस्से में
झूमा कौन सा फलक?

पर कठघरे में खड़ा किया जाना ज़्यादा  ज़रूरी है|


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