चिल्ल पौं की दुनिया
मैंने अपनी आंखें हैं बंद कर लीं।
और मैं हूं एक ऐसी दुनिया में।
जिसे मैं चिल्ल पौं की दुनिया हूं कहता।
यह दुनिया है वैसे बड़े रुखसत अंदाज में बनी।
दुनिया में इस, शोर के अलावा होता है कुछ भी नहीं।
हर आती-जाती आवाज होती है जानी पहचानी।
लेकिन फिर भी किसी के लिए ठहरता कुछ भी नहीं।
क्योंकि यह है एक ऐसी दुनिया...
जिसे मैं चिल्ल पौं की दुनिया हूं कहता।
मान लीजिए कहीं कभी किसी के लिए गलती से।
या बिना गलती हुए कुछ थम जाए।
तो समझ लेना आखिर में,
यह कुछ नहीं थमा, बल्कि दुनिया थम जाए।
क्योंकि यह दुनिया ही है ऐसी दुनिया...
जिसे मैं चिल्ल पौं की दुनिया हूं कहता
पर यह जो वक्त का कांटा है अभी अभी रूका।
मुझे तो कुछ खास नहीं पर दुनिया को जरूर चुभा।
क्योंकि वक्त पीछे जब नहीं है मुड़ सकता।
फिर उसका शोर ही क्यों रुका भला।
सुनलो अब यही है अजब गजब की दुनिया...
जिसे मैं चिल्ल पौं की दुनिया हूं कहता।
Comments
Post a Comment