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बड़े आये भगवान के लगे|

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तुम जितना भगवान-भगवान में लगे हो। पहले ये बताओ आखिर खुद के कितने सगे हो? ये  भी बताओ भगवान को जानते   कितना  हो? कभी मिले   हो उससे? तुम उसे मानते जितना हो। ये मत कहना कि फलां मंदिर में मिला हूं। चरणों में भगवन के पुष्पकमल सा खिला हूं। क्योंकि मंदिर में तुम जिससे मिले हो तुमने  उसके   , हाल चाल तक नहीं पूछे। गये थे दुखड़ा रोने अपना, चार लोगों से गुटरगूं करके आ गये। तो मानके अब यूं चलो कि तुम अपने भगवान पे जितने भी पिले हो उसे हिसाबे से अब तक बस घंटे के मिले हो। तुम जितना उसकी चापलूसी में लगे हो। ये तो बताओ क्या खुद के भी इतने सगे हो? कभी देखा है भगवान को आखिर कि दिखता कैसा है? ये मत कहने लगना कि कुम्हार की दुकान पर, बिकता जैसा है। ये तो सुनना ही नहीं कि टीवी पर महाभारत में देखा है। क्योंकि देखा तो बच्चों ने, आईरन मैन को आईमैक्स थ्रीडी में भी है। क्या कहोगे कि भगवान का साक्षात्कार रामायण पढ़कर किया है? इससे भली तो कॉमिक्स है जिसमें नाग...

कठघरा

मंदिर किन्हीं ख़ास अभिजात्य वर्ग के लिए तब भी ऐशगाह थे, आज भी हैं और हमेशा रहेंगे और रहेंगे, रहेंगे तब तलक! जब तलक किसी किसी भी मूर्त्ति को वहाँ से जाता नहीं निकाला, किया जाता कठघरे में खड़ा और जाता पूछा, बताओ हर ऐश के हिस्से में तुम्हारा क्या किस्सा है, और इस किस्से के कितने हिस्से में झूमा कौन सा फलक? पर कठघरे में खड़ा किया जाना ज़्यादा  ज़रूरी है|