अचम्भा

आज एक अचम्भा देखा|
वक्त जैसे थमा सा देखा|
जितना देखा उतना परखा|
चोरों को भी अखरा देखा|

बात पुरानी बीत गयी जब|
नींद सयानी रूठ गयी तब|
जितना जब भी मैंने परखा |
अजब गज़ब सा चरखा देखा|
आज एक अचम्भा...

बीत चुका है सोमवार अब|
बार वार की बारी है सब|
परखो तुम भी ऐसा परखा|
कहना क्या-क्या वखरा देखा|
आज एक अचम्भा...



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