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अचम्भा

आज एक अचम्भा देखा| वक्त जैसे थमा सा देखा| जितना देखा उतना परखा| चोरों को भी अखरा देखा| बात पुरानी बीत गयी जब| नींद सयानी रूठ गयी तब| जितना जब भी मैंने परखा | अजब गज़ब सा चरखा देखा| आज एक अचम्भा... बीत चुका है सोमवार अब| बार वार की बारी है सब| परखो तुम भी ऐसा परखा| कहना क्या-क्या वखरा देखा| आज एक अचम्भा...

उसूल है तो संदूक है

ये बेनज़ीर*-बेवजह, तुम नज़रों को उठाये।         अनकही-कहीं ताके-बताके जाये जा रहे हो।। उन तारों को, ना दूरबीन ना दूरंदीद के।         बेहया-बेहिचक लगार * -वार सताये जा रहे हो।। गाँव की ज़मीनों पे, ना रखो करम-नज़रें।         सियासी ज़मीन पे आस अड़ाये जा रहे हो।। ये सर्रर्रर्र सी आवाज़, मदहोशी का आलम।         *ब ताशों पे क्यूँ नज़रबाज़ गड़ाये जा रहे हो।। कुछ खास हो  गर तो  पैबस्त* कर लो नफ़्स* में।         क्यूँ रेज़े-रेज़े* पे हाईलाईटर घुमाये जा रहे हो।। इन बेरौनक हवाओं में, पैरहन* से दुश्मनी।         फ़िर क्यूँ सर्दी में शिकायत जमाये जा रहे हो ।। *बेनज़ीर- बिना किसी नज़रिये के, *लगार- क्रम, सिलसिला *ब- कुशलतापूर्वक, *पैबस्त- कसकर समेट लेना, *नफ़्स- आत्मा, *रेज़े- (बहुवचन) रेज़ा, छोटी से छोटी चीज़, *पैरहन- पहना जाने वाला लंबा सा कोट। : © "Ankush Arya", 2017

अक्सर हादसे ही हुआ करते

दु:ख देने वालों की आँखों से,             आँसू नहीं चुआ करते। राजनीति में क्यूँकि अक्सर,             हादसे नहीं हुआ करते॥ जो छिटपुट-छिटपुट बातों में,             बातों के तीर चलाते हैं। उनके ही दामन में अक्सर,             घनघोर घाव हुआ करते॥ राजनीति में क्यूँकि अक्सर... मेहनतकश परिवार को जो,             जातिगत बतलाते हैं। विद्या के अधिकार को जो,             नीच बोल धकियाते हैं। उनके ही घुटनों पर अक्सर,             ज़ालिम दर्द हुआ करते॥ राजनीति में क्यूँकि अक्सर... वारदात करने पर जो,        ...

कड़वा लगा ना!

देख रही हूँ बहुत देर से  हद  गंदे से घूरते ही हुए,  कुछ परेशान हो? अरे दोस्ती के पीछे ही पड़े हो बिना जान-पहचान के,  समझो, अंजान हो! तुम तो पीछा कर-करके गली तक भी आ गये,  कहो श्वान् हो? इंसानियत की खातिर वर्चुअली पीछा छोड़ो,  मर्ज़ इंसान हो! कैसे हुई हिम्मत जो अचानक हाथ लगाने लगे,  नालायक! हैवान! हो।। अरे कैसे घूम रहे हो गोल-गोल पिट-पिटकर,  अरे! खेतान हो? साहब मिलने आईं हैं कोई बच्चियां आपसे,  कोई पहचान हो? काफ़ी मशहूर लग रहे हैं आप कारागार में,  लगता है शान हो? : © "Ankush Arya", 2017