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अजगर बैठे हैं!

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Name shouldn't be enough. यहाँ बस खामखां बुतों से लिपटे हैं लोग| बाकी दुनिया में  कोई धंधा परेशानी नहीं है||  कभी इंशाअल्लाह तो कभी भगवान भला करेगा| तमाशा है क्या बेटा! ज़िन्दगी है कोई नादानी नहीं है|| बयार पे लिपटी जमात खड़खड़ाते पत्तों सी हो गई| बुढ़ापा है! बचपना है! यहाँ बस जवानी नहीं है|| होठों और मुँह पे चिपके हैं थप्पड़ और गालियां| समाज में आदत है! फ़ख्र है! ये कोई बीमारी नहीं है|| तारीफ़ों के हैं झूठे फ़ूल और बहती हैं मतलब की नदियाँ| बाकी मेहनत की कोई यहाँ बागबानी नहीं है|| कभी कहते हैं काट देंगे गला चीर देंगे सीना पी जाएंगे खून| हाह! हँसी आती है, ये कोई गौमूत्र या जमजम का पानी नहीं है|| : © "Ankush Arya", 2017

कड़वा लगा ना!

देख रही हूँ बहुत देर से  हद  गंदे से घूरते ही हुए,  कुछ परेशान हो? अरे दोस्ती के पीछे ही पड़े हो बिना जान-पहचान के,  समझो, अंजान हो! तुम तो पीछा कर-करके गली तक भी आ गये,  कहो श्वान् हो? इंसानियत की खातिर वर्चुअली पीछा छोड़ो,  मर्ज़ इंसान हो! कैसे हुई हिम्मत जो अचानक हाथ लगाने लगे,  नालायक! हैवान! हो।। अरे कैसे घूम रहे हो गोल-गोल पिट-पिटकर,  अरे! खेतान हो? साहब मिलने आईं हैं कोई बच्चियां आपसे,  कोई पहचान हो? काफ़ी मशहूर लग रहे हैं आप कारागार में,  लगता है शान हो? : © "Ankush Arya", 2017

तुम क्या चाहते हो

वो क्या है जो सिर में ज़हर सा बैठ गया है, और गले का सहारा लेकर बाहर आना चाहता है, और फ़िर खुद मेरे धड़ को कुचलने-निगलने लगा है, मैं शिथिल हो रहा हूँ। भावुक भी हूँ। सोच रहा हूँ उगलूँ या निगलूँ? निगलूँ तो नहीं रहूंगा। और उगलूँ तो मैं, मैं नहीं रहूंगा । क्या यही जीवन यंत्र - मंत्र - तंत्र का अंतिम संगीत है। अत्यंत भद्दा और बेसुरा। किनसे पैदा हुआ है? या स्वयं उत्पत्ति का केंद्र है? अरे! पहचाना तुम्हें, तुम वही हो ना जो मिर्च खाकर भी हंसते हो। अरे! तुम वहीं से हो ना जहाँ अक्ल-मंद लोग बसते हैं। अरे! तकियाह तो उतारो ज़रा हम भी तो देखें ऊपर से गंजे हो। अरे! ऐसे काम करते ही क्यूँ हो जिसपर सारे राज्य तुमपर हँसते हैं। कुटिल, निष्ठुर, कुरूप किन्तु हास्यास्पद... पूर्वाग्रह! पूर्वाग्रह! ओह पूर्वाग्रह! क्या इलाज करें तुम्हारा या तुम लाइलाज हो? सवाल क्यूँ करा जाये तुमसे जब तुम खुद जवाब हो। तुम छोड़ते हो मुझे खुद या मेरा आक्रोश तुम्हें पी ले॥ नियती नहीं हो तुम, मेरा अज्ञान हो! अंधकार हो! तुम्हारे खिलाफ़ है मेरा अब... सत्याग्रह! सत्याग्...