काफ़िर के जज़्बात
Add caption ऐसा भी कोई मसला नहीं था हुज़ूर | इंज़ील जो हिचकियों में मसल डाला|| दोज़ख से भी ना घबराये जानिब कभी| जो हुकुम ने दिया तरेर और डरा डाला|| क्या कज़ा क्या शिकन लाये माथे पर| जो तारीफ़-ए-बयार की अदा ने फना डाला|| मुद्दतों के सपने और ज़िंदादिली ये ज़िंदा | तिरि तहरीकों ने काफिर-ज़िंदा-बुत बना डाला|| कभी घुटनों पे टिके तो कहीं वुज़ू में हैं झुके | साज़िश है ! कहाँ नमाज़ी थे कहाँ काफ़िर बना डाला|| अब इन जुलूसों में कहाँ टिक पायेंगे बुतपरस्त | ' नज़ीर ' इन नज़रों ने कभी बना डाला कभी मिटा डाला || 1. इंज़ील = Grim The Reaper 2. दोज़ख = ...