बयार पर बूंदें
लाख दुआओं की दया या मौसम कुछ बेसब्र तुम||
सरसराहट-गड़गड़ाहट में लिपटी सी हो आंधियां|
दड़दड़ाहट-छमछमाहट में हो लिपटी तुम तालियां||
लाख पहाड़ ढालों से बनी सूरज की हो कब्र तुम|
या जीवन की आशा-अभिलाषा, पावन-निर्मल द्रव्य तुम||
हवा में लिपटी, लू में छितरी हो गर्मी को पड़ने वाली गालियाँ|
जवां उम्र का निश्छल प्रेम, या हो कुफ़्र बयां कुछ हालिया||
जो भी हो झमझम बरसो, हो बाल-सुलभ लावारिस तुम|
जो भी हो रिमझिम कर दो मन, हो पहली-पहली बारिश तुम||
अब्र = Cloud
निश्छल = Unaffected
अभिलाषा = Desire
कुफ़्र = Undesirable
बयां = Statement
बालसुलभ = Infantile
:© "Ankush Arya", 2017

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