क्षुधा से क्षुब्ध
आहार की तलाश वा शिकार भात मनुष्य अथवा सभी जानवरों के लिये, क्या सामुदयिकता का समारोह है? या यह वह प्रसाद है, जिसे वह सप्रेम अधिकार ग्रहण करता है। यापन रूपी जीवन के लिये, वा जीवन स्थित यापन के लिये? निश्चय ही सप्रेम संधि है जिसमें आवरण उच्छेद भी उतना आवश्यक है जितना परिच्छेद कथा के लिये। मानव ऐन्द्रिय रूप से सामुदायिक है, या इन्द्रियों के लिये सामुदायिक है? ये अनिवार्य क्षुब्ध प्रश्न है क्षुधा से! आहार के लिये विचार के लिये। : © "Ankush Arya", 2017