गुटर गूं

किसने कहा मुझे गुटर गूं अच्छी है लगती।
नहीं, ना मुझे गुटर गूं अच्छी है लगती!

ना ही कबूतरों कि गर्दन में धंसे,
वो चमकीले से पंख,
जिसे दिखा दिखा के
लोगों को बेवकूफ़
और कबूतर को ख़ूबसूरत
बताया बनाया जाता है।

ना ही कपोत को
हवा में लहराया फहराया जाना
बनाके जैसे कि मिसाल
में हो शांति का दूत

क्यूंकि, जैसे ही,
नज़र जाती है तरफ इनके
नज़र आता है मुझे,
अचानचक से!

गौरैयाओं का बहुत दूर
चले जाना और
फिर मुड़के कभी वापिस ना आना
समझदार लोग इसे
गौरैया के लिए
विनाश कागारी भी हैं बताते।

लेकिन सच ये है...
कि कबूतरों में मैंने अपना
बचपन ख़त्म होते देखा है।

© अंकुश कुमार

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