औकात की बात!
Glow worms vs Moon Light तुम्हारे-हमारे नसीब में टिमटिमाते तारे कहाँ हम-तुम उन ख्वाबों में हैं जिनमें कुछ खिड़कियाँ हैं तो कुछ रोशनियाँ | कुछ लोग ताक रहे हैं जिसमें एक चांद जो हर रोशनी को रोशन करेगा ना यहाँ ना वहाँ अब वो हालात कहाँ | बारिश थी और होगी होती रहेगी पर रोशनी छिटकाते बादलों की रात कहाँ बरसात कहाँ| जो जहाँ था वो वहीं ठहरा होगा रास्ते हों रोशन वो अब रात कहाँ । सुना था कभी जो चांद देहरी सोने सी रोशन करता था ना तेरी में ना मेरी में ना झोली में चांद की अब वो रात कहाँ औकात कहाँ | : © "Ankush Arya", 2017