उधड़ी मानसिकता
घर में चल रही कम्बल चर्चा पर , बच्चे ने पूछा अमुक अंकल , आपका क्या मंतव्य हो सकता है! बलात्कारी के बलात्करण पर , और बलात्कृत के बलात्कार पर । थोड़ा खोले और अधमुंदी आँखों से बोले , बेटा अभी क्यूँ है ये ज़रूरी , जो बात हो सके ना पूरी... घर में चल रही कम्बल चर्चा पर... इक घुप्पी के बाद बच्चे ने पूछा फ़िर से वैचारिक समन्वय पर दृष्टि पाने हेतु , क्यूँ ज़रूरी है अंधेरा साँकल के सुस्ताने को ? क्यूँ पड़ी हैं कच्ची बेड़ियाँ सूरज के माथे को ? क्यूँ गलती पे होता है छिपना पीछे पछताने को ? बताइये ना कहाँ छोड़ते कहाँ जकड़ते ये काले मटियाले सेतु ? आपका क्या मंतव्य हो सकता है... मानो नमक मली हुई हथेलियाँ किसी ने आँखों पे रगड़ी हों , माननीय की साँस सी उखड़ी मानो नस कसकर पकड़ी हो। बच्चे ने पूछा अमुक अंकल... पहली बार अंधेरा इस घर से सन्नाटा ला रहा था। वरना चुप्पी का बाल भी बाँका ये घर कर पा रहा था! घर में चल रही कम्बल चर्चा पर... इस मौन में सब कुछ पसरा था , संवेदनायें ...