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शुतुरमुर्ग का अंडा

तुम्हारी आँखें जैसे  शुतुरमुर्ग का अंडा उसपर आँसू ऐसे-जैसे शुतुरमुर्ग का अंडा तुम्हारा ललाट जैसे शुतुरमुर्ग का अंडा उसपर भी दिमाग ऐसे-जैसे शुतुरमुर्ग का अंडा तुम्हारा ख्याल जैसे शुतुरमुर्ग का अंडा उसपर फिर सवाल ऐसे-जैसे शुतुरमुर्ग का... तुम्हारा नक्श जैसे शुतुरमुर्ग का अंडा उसीपर हावभाव ऐसे-जैसे शुतुरमुर्ग का... तुम्हारी खिलखिलाहट जैसे शुतुरमुर्ग का अंडा उसपर मेरी हालत ऐसी-जैसे शुतुरमुर्ग का.... तुम्हारे कुछ ख़यालात जैसे शुतुरमुर्ग का अंडा फिर मेरे सवालात ऐसे-जैसे शुतुरमुर्ग का... तुम्हारी गरिमा भी जैसे शुतुरमुर्ग का अंडा और उसपर फिर इठलाना ऐसे-जैसे शुतुरमुर्ग का... तेरा आंखें दिखलाना जैसे शुतुरमुर्ग का अंडा फिर मेरी हरकत बचकाना ऐसी-जैसे शुतुरमुर्ग का... तेरे-मेरे बीच की दीवार जैसे शुतुरमुर्ग का अंडा उसपर मेरे ये हालात ऐसे-जैसे शुतुरमुर्ग का... मेरे कुछ अरमान जैसे शुतुरमुर्ग का अंडा उसपर तेरे वादे ऐसे-जैसे शुतुरमुर्ग का... तेरा कहीं खोजाना जैसे शुतुरमुर्ग का अंडा और उसपर तेरा मिल पाना ऐसे-जैसे...|